अलवर जल म कष तवरकरण एव भजल सतर म परवरतन क सथनक-कलक वशलषण (2000-2020)
Abstract
यह अध्ययन अलवर जिले में कृषि विकास और भूजल स्तर में हुए परिवर्तन के मध्य अंतर्संबंध का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अर्ध-शुष्क जलवायु एवं सीमित सतही जल संसाधनों वाले इस क्षेत्र में कृषि मुख्यतः भूजल आधारित है, जिसके कारण पिछले दो दशकों में जल स्तर पर उल्लेखनीय दबाव देखा गया है। अध्ययन में वर्ष 2000 एवं 2020 के मध्य तहसील-स्तरीय भूजल गहराई के आँकड़ों का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया है। न्यूनतम, अधिकतम, औसत गहराई तथा मानक विचलन के आधार पर स्थानिक विषमताओं को स्पष्ट किया गया है। भौगोलिक सूचना प्रणाली की सहायता से भूजल समोच्च मानचित्र तैयार कर जल तनाव क्षेत्रों की पहचान की गई। परिणाम दर्शाते हैं कि उत्तर-पूर्वी एवं कृषि-औद्योगिक तहसीलों में 20 से 30 मीटर से अधिक भूजल गिरावट दर्ज की गई है, जबकि दक्षिणी भाग अपेक्षाकृत कम प्रभावित रहे। इसी अवधि में फसल गहनता में वृद्धि पाई गई, जो भूजल दोहन की तीव्रता से प्रत्यक्षतः संबद्ध है। अध्ययन निष्कर्ष रूप में यह स्थापित करता है कि अलवर जिले में भूजल संकट क्षेत्रीय रूप से असमान किंतु संरचनात्मक रूप से कृषि-प्रेरित प्रक्रिया है। सतत जल प्रबंधन, सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों तथा फसल विविधीकरण की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए यह शोध क्षेत्रीय संसाधन नियोजन के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है।
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