यगग म उपवस क सवरप
Abstract
हठयोग के मुख्यतः आठ अंग यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान व समाधि हैं । इस अध्ययन के माध्यम से इन सभी योगांगो में उपवास के विशिष्ट स्वरूप को प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है । योग साधना में उपवास को आहार संयम तक सिमित रखा गया है क्योंकि अत्याहार को योग सिद्धि में प्रथम बाधक तत्व बताया गया है । उपवास का सामान्य स्वरूप आहार संयम तक ही सिमित है जबकि अष्टांग योग में इसे आहार संयम तक न रख कर इन्द्रिय संयम व चित्त वृत्ति निरोध का भी अंग माना गया है । इस शोध से यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है की हठयोग के अंग व उपांग की सिद्धि में उपवास का अपना एक अलग स्थान है । योगसाधना में योग की सिद्धि के लिए उपवास को योग का एक अभिन्न अंग माना गया है क्योंकि इसके बिना योग सिद्धि मुस्किल ही नहीं नामुमकिन है । यौगिक जीवन पद्धति में योग सिद्धि व जीवन के मुख्य उद्देश्य मोक्ष की प्राप्ति में उपवास का विशेष महत्त्व है ।
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