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जलवय परवरतन स कष फसल पर एक भगलक अधययन (भरत क वशष सदरभ म)

Abstract

किसी क्षेत्र विशेष की परंपरागत जलवायु में समय के साथ होने वाले परिवर्तन को जलवायु परिवर्तन कहा जाता है। जलवायु में आने वाले परिवर्तन के प्रभाव को एक सीमित क्षेत्र में अनुभव किया जा सकता है और पूरे विश्व में भी। आज के वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन की स्थिति गंभीर दशा में पहुँच रही है और पूरे विश्व पर इसका प्रतिकूल असर देखने को मिल रहा है। संयुक्त राष्ट्र की जलवायु रिपोर्ट (ब्सपउंजम तमचवतज व िन्छव्) में बताया गया है कि जलवायु परिवर्तन का पर्यावरण के सभी पहलुओं के साथ-साथ वैश्विक आबादी के स्वास्थ्य और कल्याण पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन की अगुवाई में तैयार रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन के भौतिक संकेतों- जैसे भूमि और समुद्र के तापमान में वृद्धि समुद्र के जल स्तर में वृद्धि और बर्फ के पिघलने के अलावा सामाजिक-आर्थिक विकास, मानव स्वास्थ्य, प्रवास और विस्थापन, खाद्य सुरक्षा और भूमि तथा समुद्र के पारिस्थितिक तंत्र पर प्रभाव का अभिलेखिकरण किया गया है।

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