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भरत क मधय कषतर क आदवसय म धरम क अवधरण एव पज वध (छततसगढ़ रजय क बसतर कषतर क वशष सदरभ म)

International Journal of Advanced Academic Studies · 2021 · Vol. 3(1) · pp. 345–347

Abstract

भारत में बड़ी संख्या में आदिवासियों की बसाहट है इन्हें मोटे तौर पर तीन भौगोलिक क्षेत्रों में बाँटा जा सकता है- पहला उत्तर पूर्वी क्षेत्र दूसरा मध्य क्षेत्र और तीसरा दक्षिण पश्चिमी क्षेत्र | मध्य क्षेत्र के अंतर्गत बस्तर में गोंड मुरिया भारिया और हल्बी आदिवासी विशेष रूप से बसी हुई है | अन्य क्षेत्र के आदिवासियों की तरह बस्तर के आदिवासियों के जीवन में भी मिथक और लोक कथाएँ बहुत महत्व रखती हैं वहीं वे उनके धार्मिक जीवन को भी संचालित करती हैं | यहाँ मुख्यतः बूढ़ा देव की पूजा की जाती है महादेव पार्वती सृष्टि के सर्जक के रूप में पूजे जाते हैं | बस्तर के लिंगोपारा नामक महाकाव्य में भी वर्णित है कि गोड़ों के मिथकीय नायक लिंगो (महादेव) के नेतृत्व में गोंड़ बस्तर आये | अन्य क्षेत्र के आदिवासियों की तरह बस्तर के आदिवासियों की पूजा विधि भी प्रकृति पर आधारित है अर्थात वे प्रकृति पूजक हैं | उनके धार्मिक जीवन और विश्वास पर सम्यक दृष्टि प्रस्तुत शोध का उद्देश्य है

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